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| हासिल की गयी उंचाई |
समय (भारतीय मानक समय) |
| उडान भरने का वक्त |
६:३९ पूर्वाहन |
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५००० फीट |
७:१२ पूर्वाहन |
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१०,००० फीट |
७:२५ पूर्वाहन |
| २०,००० फीट |
७:४४ पूर्वाहन |
| ३०,००० फीट |
७:५४ पूर्वाहन |
| ४०,००० फीट |
८:०५ पूर्वाहन |
| ५०,००० फीट |
८:१७ पूर्वाहन |
| ६०,००० फीट |
८:३३ पूर्वाहन |
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६९,८५२ फीट |
८:५५ पूर्वाहन |
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जमीन पर पहंुचने का वक्त |
११:३० पूर्वाहन | |
डॉ. सिंघानिया ने नामुमकीन से लक्ष्य को मुमकिन साबित किया ।
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मुम्बई, २६ नवम्बर, २००५ : सुप्रसिध्द उद्योगपति और अप्रतिम हवाबाज डॉ. विजयपत सिंघानिया ने गर्म हवा के गुब्बारे में बैठकर समुद्रतल से ६९,८५२ फीट की उंचाई पर पहुंचकर आसमान में नयी बुलंदी को छुते हुए विश्व रिकॉर्ड बनाया । इस तरह से वे इस माध्यम से इस उंचाई पर पहुंचनेवाले पहले व्यक्ति बन गये । इस रिकॉर्ड को भारतीय एयरो क्लब व्दारा दर्ज किया गया है । और यह क्लब अंतरराष्ट्रिय रिकॉर्ड की मान्यता हेतु संबंधित निकाय-फेडरेशन एयरोनॉटिक इंटरनेशनेल में आवेदन करेगा ।
इस ऐतिहासिक दिन को डॉ. सिंघानिया ने पोलो मैदान, महालक्ष्मी रेस कोर्स से प्रात ७ बजकर ३९ मिनट पर उड़ान भरी और ६०० से ७०० फीट प्रति मिनट के औसत गति से उस हैरत अंगेज उंचाई पर लगभग २ घण्टे १४ मिनट में पहुंच गये । भारत के लिये विश्व कीर्तिमान बनाकर इतिहास रचते हुए डॉ. सिंघानिया ११ बजकर ३० मिनट पर शिर्डी और नासिक के बीच सिन्नर में सुरक्षित रूप से उतर गये । उन्होंने यह रिकॉर्ड मुम्बई की सीमा पर स्थित मध्य रेल उल्हास नगर के आकाश पर बनाया । इस कीर्तिमान के व्दारा डॉ. सिंघानिया ने पीटर लिण्डस्ट्रैण्ड व्दारा टेक्सास, अमेरिका स्थित पियानो में ६ जून १९८८ को गर्म हवा के गुब्बारे में ६४,९९७ फीट (१९८११ मीटर) की उंचाई को छूने के मौजूदा रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया ।
इन गौरवपूर्ण व उल्लास के क्षणों में डॉ. विजयपत सिंघानिया, के पुत्र श्री गौतम सिंघानिया, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रेमण्ड लिमिटेड, ने कहा, ''यह देखकर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं है कि मेरे पिता ने विश्व रिकॉर्ड बनाया है और पुरे देश के लिये यह बेहद गर्व का क्षण है । मेरे पिता ने साबित कर दिखाया है कि वे भारत के बहादुर सपूत है । उनकी उड़ान के दौरान कई क्षण ऐसे आये थे कि हम चिन्तित हो गये थे, किन्तु हमें यकीन था कि वे रिकॉर्ड तोडने में कामयाब होंगे और हमें खुशी है कि अब यह रिकॉर्ड भारत के पास है ।"
हर्षोल्हास के इस अवसर पर मौजूद डॉ. विजयपत सिंघानिया की पत्नी श्रीमती आशाबाई सिंघानिया और उनकी पुत्री सुश्री शेपाली रुइया खुशी से भाव-विभोर थीं ।
फ्लाइंग पिक्चर्स कम्पनी (यू.के.) के प्रतिनिधि और परियोजना एमआई-७० के तकनीकी दल के सदस्य कॉलिन प्रेस्कॉट ने कहा, "उड्डयन की दुनिया में आज के दिन को भारत और इस क्षेत्र में महान दिन के रूप में याद रखा जाएगा । यह एक अति सज्जन व्यक्तित्व की बेहद साहसिक उडान थी ।"
डॉ. सिंघानिया चार दशको से "उड्डयन क्षेत्र में सक्रिय हैं और उन्हे उड़ान भरने का पूर्ण अनुभव है । चुनौतियो का मुकाबला करना और रिकॉर्ड तोडना डॉ. सिंघानिया के लिए कोई नयी बात नहीं है । यह उनकी जिन्दगी का एक हिस्सा है । उड्डयन के क्षेत्र में अनेक पुरस्कार और सम्मान हासिल करने के बावजूद उनके मन में देश के लिए कुछ खास उपलब्धि हासिल करने की सतत् कामना मौजूद रहती है । डॉ. सिंघानिया ने स्वयं इस असंभव कार्य को संभव करने की ठानी थी । राष्टीय गौरव और जोखिम उठाने की साहस ने उन्हे प्रेरित किया कि वे भारत भूमि स्थित अपने शहर मुम्बई में इस रिकॉर्ड को तोडें ।
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